कलिकाल में नामजप ही मुक्ति का सर्वोत्तम साधन: अवधेश जी महाराज

अजीत पार्थ न्यूज बनकटी, बस्ती

जनपद के महादेवा चौराहे पर आयोजित सवा करोड़ श्री रामनाम महायज्ञ एवं पंचदिवसीय संगीतमयी श्रीहनुमंतकथा के विश्राम दिवस अवधधाम से पधारे हुए रामकथा के मर्मज्ञ अवधेश जी महाराज नें उपस्थित श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराते हुए कहा कि,इस घोर कलिकाल में रामनाम के जप से ही मुक्ति मिल सकती है, यही सबसे सरल और सर्वोत्तम उपाय है।

श्रीरामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी नें कहा है कि “कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिरि-सुमिरि नर उतरहिं पारा”। उन्होंने कथा का विस्तार रूप देते हुए कहा कि रामनाम का आत्मसात समय से करने के कारण व्यक्ति को विशेषता प्राप्त होती है, श्रीहनुमान जी महाराज नें समय से रामनाम को आत्मसात कर लिया था, इस कारण वह आज भी अजर और अमर हैं। जबकि लंकाधिपति रावण मृत्यु के समय राम को सुमिरन किया, जिससे उसका उद्धार तो हो गया, किंतु समय पूर्व न करने के कारण वह आज भी जलाया जाता है।

रामकथा हमें ज्ञान,भक्ति एवं मुक्ति का मार्ग दिखलाती है। मनुष्य संपूर्ण जीवन माया,मोह और आडंबर में लिप्त रहता है,किंतु अंत समय में रामनाम ही उसके मुक्ति का द्वार खोलता है। इस कारण प्रत्येक व्यक्ति को नामदान अवश्य करना चाहिए।

इस दौरान प्रमुख रूप से कथा के आयोजक डॉ.आर.पी.शुक्ला, रविचंद्र पांडेय, जगदंबा शुक्ला, डॉ. अनिल कुमार मौर्य, नगर पंचायत गायघाट अध्यक्ष प्रतिनिधि पिंटू तिवारी, महन्त देवराम दास, ब्रह्मानंद शुक्ला, अशोक उपाध्याय, संजीव त्रिपाठी, राणा प्रताप पाल, ओमप्रकाश सिंह, विनय कुमार दुबे, डॉ.अनुराधा पांडेय, शिवांशु शुक्ला, देवी प्रसाद तिवारी, बलिराम मौर्य सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

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