∆∆•••भगवान श्रीराम का जीवन हर परिस्थिति में धैर्य, मर्यादा और समभाव की शिक्षा देता है: डॉ. बृजेश यादव
बस्ती
सनातन धर्म संस्था बस्ती द्वारा आयोजित “श्रीरामलीला महोत्सव बस्ती” के प्रतिभागी बच्चों, प्रशिक्षकों एवं सहयोगी विद्यालयों के सम्मान में भव्य पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन अटल बिहारी वाजपेयी प्रेक्षागृह, सिविल लाइन, बस्ती में संपन्न हुआ। इस अवसर पर श्रीरामलीला महोत्सव में प्रतिभाग करने वाले लगभग 650 बाल कलाकारों को सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया। साथ ही विभिन्न विद्यालयों के प्रशिक्षकों को भी उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया गया।

मंच को साष्टांग प्रणाम करते हुए मुख्य अतिथि डॉ.बृजेश यादव
श्रीरामलीला महोत्सव बस्ती एक अद्भुत एवं अनूठा आयोजन है, जिसमें बस्ती मंडल के 20 विद्यालयों के लगभग 650 बच्चे मिलकर भगवान श्रीराम के जीवन पर आधारित 20 भागों की रामलीला का मंचन करते हैं। इस प्रकार की बाल सहभागिता वाली रामलीला को उपस्थित लोगों ने अत्यंत प्रेरणादायी एवं संस्कार निर्माण करने वाला आयोजन बताया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नाथ नगरी बरेली से पधारे प्रख्यात सर्जन,मानस मर्मज्ञ एवं श्रीराम भक्त डॉ. बृजेश यादव रहे। उनके साथ कर्नल केसी मिश्र, वयोवृद्ध श्रीरामभक्त जोशी जी तथा संभल से पधारे क्षेमनाथ तीर्थ के महंत बाल योगी दीनानाथ जी महाराज, डॉ अश्विनी सिंह व उपस्थित अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर एवं भगवान श्रीराम के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके पश्चात सभागार में उपस्थित पाँच सौ से अधिक बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों एवं अतिथियों ने सामूहिक रूप से श्रीराम स्तुति का पाठ किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों के बच्चों ने मंच पर अपने अनुभव साझा किए। बच्चों ने बताया कि श्रीरामलीला में अभिनय करते हुए उन्हें भगवान श्रीराम के जीवन, त्याग, मर्यादा और आदर्शों को समझने का अवसर मिला। बच्चों ने अपने निभाए गए पात्रों एवं उनसे प्राप्त शिक्षाओं पर विचार व्यक्त किए, जिसे सुनकर पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा।
मुख्य अतिथि डॉ. बृजेश यादव ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन प्रत्येक मानव के लिए आदर्श है। उन्होंने कहा कि श्रीराम का चरित्र हमें सिखाता है कि जीवन में परिस्थितियाँ कैसी भी हों, व्यक्ति को धैर्य और समभाव नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने भगवान राम के वनवास प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस राजकुमार को अगले दिन युवराज बनने की घोषणा हो चुकी हो, उसी को अगले ही दिन वनवास का आदेश मिल जाए और फिर भी उसके मन में न अत्यधिक हर्ष हो और न विषाद यह केवल भगवान श्रीराम के जीवन से ही सीखना संभव है। उन्होंने कहा कि राजसी वस्त्र, वैभव और सिंहासन छोड़कर भगवान राम जिस सहजता से वन की ओर निकल पड़े, वह संसार को कर्मपथ पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने बच्चों से कहा कि जीवन में अवसाद, निराशा और आत्महत्या जैसी स्थितियों से बचने के लिए भगवान श्रीराम के जीवन को समझना आवश्यक है। श्रीराम हमें सिखाते हैं कि परिस्थितियाँ बदल सकती हैं, लेकिन धैर्य और कर्तव्य नहीं बदलना चाहिए।
डॉ. यादव ने भगवान श्रीराम के आदर्शों का वर्णन करते हुए कहा “प्रातःकाल उठि कर रघुनाथा, मातु पिता गुरु नावहिं माथा” अर्थात भगवान श्रीराम प्रतिदिन प्रातः उठकर माता-पिता और गुरुजनों को प्रणाम करते थे। उन्होंने बच्चों से आग्रह किया कि वे प्रतिदिन अपने माता-पिता, गुरुजनों और बड़ों का अभिवादन करें। ऐसा करने से आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन सुखमय एवं सुंदर बनता है।
उन्होंने बच्चों को अपनी मातृभूमि, परिवार, समाज और संस्कृति से जुड़े रहने का संदेश देते हुए भगवान श्रीराम के वचनों का उल्लेख किया “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने स्वर्णमयी लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद भी उसे स्वीकार नहीं किया, क्योंकि उनके लिए अपनी जन्मभूमि और मातृभूमि सर्वोपरि थी। उन्होंने बच्चों से कहा कि जब राम जैसा आचरण जीवन में आएगा तो क्रोध, अहंकार, विकार और नकारात्मक प्रवृत्तियाँ स्वतः समाप्त हो जाएँगी और जीवन सुंदर बन जाएगा।
इस अवसर पर सनातन धर्म संस्था द्वारा बरेली से आए लगभग बीस श्रीराम भक्तों का भी स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। बच्चों को प्रमाणपत्र एवं पुरस्कार वितरित किए गए।
अतिथियों का स्वागत भाषण कैलाशनाथ दुबे ने किया, जबकि कर्नल के सी मिश्र एवं अखिलेश दूबे ने कार्यक्रम के अंत में सभी आगंतुकों, विद्यालयों, शिक्षकों एवं अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिनमें डॉ. आलोक पाण्डेय, एम.पी. दुबे, सत्य प्रकाश सिंह, डॉ. शैलेश सिंह, मनीष सिंह, अर्पित गौड़, पूजा, मान्यता, डॉ देवानंद सिंह, अंकुर यादव, भोलानाथ चौधरी, ओमकार मिश्र, डॉ डी के गुप्ता, राजेश मिश्र, संतोष श्रीवास्तव, बबलू मेहदी, सुनील शुक्ल, अनुराग शुक्ल, पंकज त्रिपाठी,सुनील सिंह, हरिश त्रिपाठी, सुनील यादव सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
समारोह के अंत में संस्था पदाधिकारियों ने भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों एवं श्रीराम के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।


