अजीत पार्थ न्यूज एजेंसी
जनपद कानपुर में कमिश्नरेट पुलिस नें अवैध ढंग से किडनी ट्रांसप्लांट करने वाले रैकेट का पर्दाफाश किया है। जांच के बाद पुलिस नें कई संस्थानों, अस्पतालों और उनके संचालकों पर मुकदमा पंजीकृत किया है। उक्त खुलासा किडनी ट्रांसप्लांट की एक शिकायत के बाद किया गया है। कानपुर के पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के अनुसार अवैध किडनी रैकेट ट्रांसप्लांट के गंभीर मामले में आधा दर्जन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि सभी आरोपियों को जेल भेजा जाएगा।

आरोपियों में डॉ.सुरजीत सिंह आहूजा, डॉ. प्रीती आहूजा, डॉ. राजेश कुमार, शिवम अग्रवाल, डॉ. राम प्रकाश और डॉ. नरेंद्र सिंह शामिल हैं। आरोपियों से पुलिस को भारी मात्रा में दवाइयां भी प्राप्त हुई हैं।
एसीपी कल्याणपुर आशुतोष कुमार के अनुसार सोमवार की देर रात शहर के तीन अस्पतालों प्रिया हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर, आहूजा हॉस्पिटल और मेडलाफ अस्पताल में छापेमारी की गई। क्राइम ब्रांच और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम नें इस मामले की जांच किया। जांच के बाद कई अस्पताल संचालकों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत किया गया है।
पुलिस के अनुसार उक्त सभी आरोपियों विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य उऊ हैं। इनमें डॉ. इंदरजीत सिंह, डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा सहित अन्य आरोपी शामिल हैं।
आरोपियों ने एक दलाल के माध्यम से उत्तराखंड निवासी एक युवक की किडनी को 8 से 9 लाख रुपये में खरीदा था। इसके बाद महिला मरीज में वह किडनी ट्रांसप्लांट करते हुए उससे 80 से 90 लाख रुपये की मोटी रकम वसूली गई थी।
इस तरह के खेल में शहर के कई अन्य अस्पताल संचालकों के नाम भी सामने आए हैं। यह भी पता चला है कि जो डोनर होते थे और जो रिसीवर हैं, उन्हें अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया जाता था।
डोनर नें एक दलाल शिवम का नाम पुलिस को बताया है, जिसने पचास हजार रुपये की रकम फंसा दी थी। रकम न मिलने पर पीड़ित नें पुलिस कमिश्नर से शिकायत किया था।
उक्त शिकायत के बाद कमिश्नरेट पुलिस के अधिकारियों की टीम के सदस्यों नें कानपुर में अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट करने वाले रैकेट का भंडाफोड़ किया।
पुलिस के अनुसार आरोपियों से जब इस मामले में पूछताछ की गई तो सामने आया कि उन्होंने देश के कई राज्यों में अपना नेटवर्क फैला रखा है। पहले डोनर की तलाश की जाती थी, फिर जो मरीज किडनी ट्रांसप्लांट कराना चाहते थे, उससे मोटी रकम ऐंठने की योजना बनाई जाती थी। रिसीवर के हामी भरते ही डोनर को बुलाया जाता था।
इसके बाद रिसीवर की किडनी में स्टोन या कोई अन्य बीमारी का पर्चा और फाइलें तैयार कर उसे भर्ती किया जाता था। इसके बाद किडनी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया को पूरा किया जाता था। कानपुर में जिस मामले का खुलासा कमिश्नरेट पुलिस ने किया है, उसमें महिला मरीज की किडनी ट्रांसप्लांट कराई गई थी।


