कलिकाल में मोक्ष का सबसे सरल उपाय है भगवन्नाम जप : डाॅ.अनुरंजिका चतुर्वेदी

अजीत पार्थ न्यूज संवाददाता वाराणसी

सनातन धर्म के मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु सतत प्रयत्नशील ” संस्कृति सेवा न्यास ” द्वारा ट्रस्ट के सभाकक्ष साकेतनगर,संकटमोचन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान-यज्ञ के द्वितीय दिवस कथाव्यास डॉ.अनुरंजिका चतुर्वेदी नें उपस्थित श्रद्धालुओं को कथा का मर्म बताते हुए कहा कि यह सृष्टि सात पदार्थों में ही सन्निहित है।

सात का विवेचन करते हुए उन्होंने कहा कि सप्तमातृकाओं के संरक्षकत्व में चल रहे संसार में सात रंग और सात दिन हैं। राजा परीक्षित की मृत्यु भी शापित होने के कारण सातवें दिन ही होनी थी। अतः उस संक्षिप्त काल में जीवन को सफल बनाने तथा गमनागमन के चक्र से मुक्ति हेतु नाम संकीर्तन को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी नें भी-” कलियुग केवल नाम अधारा,सुमिरि सुमिरि नर उतरहिं पारा” कहा है।

डॉ.चतुर्वेदी नें कथा का विस्तार करते हुए कहा कि व्यक्ति को दुःखों से घबराना नहीं चाहिए। क्योंकि दु:ख के दिनों में ही हृदय से भगवत स्मरण हो पाता है,यही कारण है कि महाभारत के संकटकाल से विजय दिलाने के पश्चात् जब श्रीकृष्ण जाने लगे तो कृष्ण से कुन्ती ने दु:ख माँगा था। कृष्ण के आश्चर्यजनक भाव प्रकट करने पर कुन्ती नें कहा-“लाला ! दु:ख के दिनों में तुम निरंतर साथ रहे, नंगे पांव दौड़े आए और जब सुख के दिन आए तो तुम भी साथ छोड़कर जा रहे हो। इसलिए मुझे वह सुख नहीं चाहिए जिसमें तुम्हें भूल जाऊँ। मुझे तो वह दु:ख ही चाहिए जिसमें तुम्हारा साथ और कृपा बनी रहे।”

कर्म की प्रधानता का विश्लेषण करते हुए श्रोताओं के दिलों पर राज करने वाली कथा-व्यास अनुरंजिका जी नें कहा कि कर्म को व्यावहारिक रूप देने से पूर्व भली- भांति विचार करना चाहिए। क्योंकि “अवश्यमेव भोक्तव्यं कृतं कर्म शुभाशुभम् ” भीष्म पितामह यदि वक्त पर अपने विवेक और अधिकाररूपी कर्तव्य (कर्म) का प्रयोग किए होते तो महाभारत जैसा अनर्थ होने से बच गया होता। किन्तु समय पर चूक जाने के कारण ही उन्हें प्रायश्चित्त स्वरूप बाणों की शैय्या पर इतने दिनों तक रिसते हुए रक्त की एक-एक बूंद का असहनीय कष्ट उठाना पड़ा “।

कथा के बीच में प्रसंगानुसार भजनों की रसवर्षा करने वाले संतोष तिवारी के साथ संगत करने वालों में तबले पर राजीव झा के साथ बाल कलाकार संस्कार शंकर चतुर्वेदी और आर्गन पर चन्द्र प्रकाश आदि कलाकार रहे। कथा के प्रारंभ में व्यासपूजन दिल्ली से पधारी गीता संसनवाल ने तथा अन्त में भागवत जी की आरती हरियाणा से आयी हुई ज्योति छिकारा नें किया।

इस दौरान डॉ.डीएन त्रिपाठी, प्रद्युम्न तिवारी, डॉ.संजीव शर्मा, डॉ. सविता चतुर्वेदी, डीपी सिंह सिसोदिया, नेहा मिश्रा, मनीषा पाण्डेय, विकास पाण्डेय सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

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