मृतक थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह को ब्लैकमेल करने वाले शख्स को तलाश रही है पुलिस, वॉयस मैसेज भेजकर बनाया जा रहा था थानेदार पर दबाव, मोबाइल नंबर की हो रही है पहचान 

अजीत पार्थ न्यूज बस्ती

जनपद के वाल्टरगंज थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में पुलिस जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए तथ्य सामने आ रहे हैं। मामले में एक संदिग्ध मोबाइल नंबर और कुछ ऑडियो संदेश पुलिस की जांच का अहम हिस्सा बन गए हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि थानाध्यक्ष को वॉयस मैसेज भेजकर कथित तौर पर ब्लैकमेल किया जा रहा था और उन पर दबाव बनाया जा रहा था।

उल्लेखनीय है कि विगत शनिवार की शाम वाल्टरगंज थानाध्यक्ष रहे सूर्य प्रकाश सिंह का शव उनके सरकारी आवास में फंदे से लटका हुआ मिला था। घटना के बाद पुलिस ने आत्महत्या की आशंका को देखते हुए जांच शुरू की। मौत की वास्तविक वजह सामने लाने के लिए उनके मोबाइल फोन समेत अन्य डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है।

पुलिसिया जांच के दौरान ब्लैकमेलिंग से जुड़ा एक अहम सुराग सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, सूर्य प्रकाश सिंह को एक व्यक्ति द्वारा ऑडियो भेजकर कथित रूप से ब्लैकमेल किया जा रहा था। हालांकि,उक्त ऑडियो में क्या बातचीत थी और उसमें किस तरह का दबाव बनाया जा रहा था, इसका पूरा खुलासा अभी नहीं हुआ है।

पुलिस अब उस व्यक्ति की पहचान करने में जुटी है, जिसने कथित तौर पर ऑडियो भेजकर थानाध्यक्ष पर दबाव बनाया था। इसके साथ ही ऑडियो से जुड़े अन्य संदिग्ध मोबाइल नंबरों और उनसे होने वाली बातचीत की भी पड़ताल की जा रही है।

पुलिस अन्य संदिग्ध नंबरों से होने वाली बातचीत और उनके संपर्कों की जानकारी भी जुटा रही है। ब्लैकमेलिंग के पीछे कई लोगों के शामिल होने की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संदिग्ध नंबरों का इस्तेमाल कौन कर रहा था और थानाध्यक्ष से उनका क्या संबंध था।

दो मोबाइल नंबरों की सीडीआर निकलवाने के बाद एक-एक नंबर का सत्यापन कराया जा रहा है। साथ ही मोबाइल फोन से डिलीट किए गए चैट, वीडियो आदि को रिकवर करने का प्रयास भी किया जा रहा है।

डीआईजी बस्ती रेंज संजीव त्यागी के अनुसार मामले की गहराई से जांच की जा रही है। सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कड़ियां जोड़ी जा रही हैं और कुछ सुराग भी हाथ लगे हैं। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही मामले में कुछ स्पष्ट रूप से कहा जा सकेगा।

फिलहाल पुलिस ऑडियो, मोबाइल नंबर, सीडीआर और डिजिटल साक्ष्यों को आपस में जोड़कर पूरे घटनाक्रम की कड़ी तलाश रही है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इन साक्ष्यों के जरिए थानाध्यक्ष की मौत के पीछे की वास्तविक वजह और कथित ब्लैकमेलिंग करने वाले व्यक्ति तक पहुंचा जा सकेगा।

हालांकि पुलिस नें अभी तक किसी व्यक्ति की भूमिका को अंतिम रूप से तय नहीं किया है। इसलिए ब्लैकमेलिंग के एंगल को फिलहाल जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है,न कि अंतिम निष्कर्ष।

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