डा.अजीत मणि त्रिपाठी बस्ती
विगत कुछ महीनों में बस्ती जनपद के पुलिस महकमें में हुए तीन घटनाओं के कारण जनपद में तैनात उपनिरीक्षकों एवं इंस्पेक्टरों को सोचने को मजबूर कर दिया है। स्थिति यह है कि अवैध संबंधों एवं अवैधानिक तरीके से की जा रही वसूली के चक्कर में दो उपनिरीक्षकों को जान से हाथ धोने के साथ एक को विभागीय सेवा से बर्खास्त होना पड़ा।
पहला मामला साल 2026 के फरवरी महीने का है। जब 5 फरवरी को परसरामपुर थाने में तैनात उपनिरीक्षक अजय गौड़ संदिग्ध परिस्थिति में लापता हो गए और उनका शव लापता होने के पाँच दिन बाद बस्ती जनपद और अयोध्या की सीमा पर स्थित सरयू नदी से बरामद किया गया। मूल रूप से देवरिया जनपद के कोतवाली सदर थाना क्षेत्र के कूड़ाडीह ग्राम निवासी दारोगा अजय गौड़ जिस दिन लापता हुए थे उस दिन वह परसरामपुर थाने के बतौर प्रभारी थानाध्यक्ष के पद पर कार्यरत थे। उनके छोटे भाई तत्कालीन एडीएम झांसी अभय गौड के मुताबिक उनके बड़े भाई अजय गौड़ की हत्या हुई है। जबकि पुलिसिया जांच एवं डायटेम टेस्ट में उनकी मौत आत्महत्या के कारण होना बताया गया।

फाइल फोटो-मृतक दारोगा अजय गौड
फिलहाल परिजनों का आरोप है कि उनकी हत्या हुई है, जबकि पुलिस के मुताबिक दारोगा अजय गौड़ नें आत्महत्या किया था। फिलहाल उक्त मामला आरोप और प्रत्यारोप के बीच में समाप्त हो गया। लेकिन पुलिस विभाग के ऊपर एक प्रश्नचिन्ह लगा गया कि आखिरकार किन परिस्थिति में दारोगा की मौत हुई। पुलिस विभाग की जानकारों के मुताबिक दारोगा की मौत की कहानी अवैध वसूली के चक्कर में तो नहीं हुई है, फिलहाल उक्त मामला भविष्य के गर्त में समा चुका है।
पुलिस विभाग का सबसे सनसनीखेज मामला विगत 29 अगस्त को जनपद में घटित हुआ। जब वाल्टरगंज थाने में तैनात थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह का शव कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित उनके सरकारी आवास पर संदिग्ध परिस्थिति में लटका हुआ पाया गया।

फाइल फोटो- मृतक थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह
पुलिसिया जांच में उक्त मामला ब्लैकमेलिंग से संबंधित पाया गया और मामले में जांच की कड़ी जोड़ने पर पूरा मामला अपने से आधी उम्र की युवती के साथ अवैध संबंधों के कारण थानाध्यक्ष द्वारा आत्मग्लानि में उठाया गया कदम था। फिलहाल पुलिस नें उक्त मामले में वांछित युवती प्रियंका चौधरी और उसके पिता रामनयन चौधरी सहित अधिवक्ता विजय प्रकाश यादव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
बस्ती जनपद में घटित एक अन्य मामले के मुताबिक साल 2021 के अगस्त महीने में दुबौलिया थाने में तैनात दारोगा अशोक चतुर्वेदी को ऊँजी मुस्तहकम ग्राम में एक महिला के साथ रंगरेलियाँ मनाते समय ग्रामीणों नें रंगेहाथ पकड़ने के बाद खंभे मे बाँधकर पिटाई किया गया था। आरोप है कि उस दौरान अपने आप को ग्रामीणों से घिरा हुआ देखकर दारोगा द्वारा सर्विस रिवॉल्वर से फायर भी कर दिया गया था। घटना की सूचना पर तत्कालीन दुबौलिया थाने के प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार त्रिपाठी द्वारा मौके पर पहुंचकर दारोगा को ग्रामीणों से मुक्त कराया था, और घायलावस्था में दारोगा को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

फाइल फोटो- बर्खास्त दारोगा अशोक चतुर्वेदी
उक्त मामले में गांव के संग्राम सिंह की तहरीर पर दुबौलिया थाने में संबंधित दारोगा के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत हुआ था और रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन पुलिस अधीक्षक आशीष श्रीवास्तव की संस्तुति पर आईजी अनिल कुमार राय द्वारा उपनिरीक्षक अशोक चतुर्वेदी को बर्खास्त करने की कार्रवाई की गई थी।
उक्त तीनों मामले पुलिस विभाग में कार्यरत लोगों के लिए ज्वलंत बानगी है,उक्त घटित घटनाओं से उन्हें सबक लेना होगा। फिलहाल पुलिस महकमे में तैनात लोगों को अपनी एवं पारिवारिक प्रतिष्ठा को ध्यान में रखते हुए शुचिता पूर्वक एवं कर्तव्य निष्ठा के साथ अपने नैतिक दायित्वों का निर्वहन करना होगा।


