विशेष रिपोर्ट- डॉ.अजीत मणि त्रिपाठी
अगर आप अयोध्या दर्शन करने का मन बना रहे हैं, तो अपनी इच्छा को त्याग दीजिए। हां अगर आप युवा हैं और पैदल चलने तथा भीड़ में अपने आप को घुसेड़ने का माद्दा रखते हों, तो दर्शन की इच्छा को आगे बढ़ा सकते हैं। राम की अयोध्या जो कभी साधु,संतों, वैरागियों और भजनानंदियों तथा गृहस्थों की होती थी, वह अब खाकीधारियों के स्वयंकथित नियमों पर चलने वाली अयोध्याधाम हो गई है।

इसी के साथ-साथ यहां आम बाजार में बिकने वाला हर सामान दोगुने मूल्य पर मनमानी तौर पर बिक रहा है, और अगर आपको अपनी गाढ़ी कमाई का दोगुना रुपया खर्च करना है, तो रामलला का दर्शन करने आप अयोध्या आ सकते हैं। प्रभु श्रीराम की अयोध्या अब वर्दीधारियों की अयोध्या हो गई है। खाकीधारी ऐसी परिस्थितियां बनाएंगे कि आपको अयोध्या के सीमावर्ती क्षेत्र में चकरघिन्नी की तरह घूमना होगा और आपका चार पहिया वाहन घंटे के रेट से संचालित वाहन पार्किंग में शोभा बढ़ाएगा।

रही-सही कसर अयोध्या विकास प्राधिकरण द्वारा संचालित गोल्फकोर्ट गाड़ियां जो कि आरटीओ द्वारा निर्धारित बगैर नंबर के आस्था रथ के नाम से रामपथ पर संचालित होकर, आपकी आस्था से खिलवाड़ कर रही हैं। इन गाड़ियों पर अयोध्या विकास प्राधिकरण द्वारा स्वयं द्वारा निर्मित नंबर अंकित किए गए हैं। मानक विहीन अवस्था में असुरक्षित चल रहे, उक्त इलेक्ट्रिक वाहन कब आपको खरोंच और घसीट दें इसकी कोई गारंटी नहीं है।

कभी नयाघाट पुल के नाम से विख्यात जो अब वर्तमान समय में लता मंगेशकर चौक हो गया है,वह अयोध्या का प्रवेश द्वार हुआ करता था, लेकिन अब वह प्रवेश द्वार न होकर निकास द्वार हो गया है, क्या मजाल कि अब आप इस रास्ते से अयोध्या में प्रवेश कर लें। यहां से कुछ वर्ष पूर्व जब चार पहिया वाहनों का प्रवेश बंद हुआ तो,बस्ती, गोरखपुर,गोंडा, बहराइच की तरफ से आने वाले श्रद्धालु हनुमान गुफा के रास्ते से दंतधावन कुंड (अयोध्या की बोलचाल की भाषा में दतुअन कुंड) से रामपथ पर पहुंचकर हनुमानगढ़ी और रामलला का दर्शन कर लेते थे। लेकिन अब पुलिसिया खाके में यह क्षेत्र रेड जोन में आ गया है,जिससे यहां पर भी प्रवेश बंद कर वाहनों को अयोध्या रेलवे स्टेशन पर पहुंचाकर श्रीराम अस्पताल के निकट भेज दिया जा रहा है। चाहे आप हनुमान गुफा से अथवा सहादतगंज से अयोध्या में प्रवेश करें, लेकिन पुलिस वाले ट्रैफिक नियंत्रण की बात कर अशर्फी भवन होते हुए छोटी देवकाली के रास्ते आपको अयोध्या मुख्य क्षेत्र से बाहर निकाल देंगे।
विगत महीने अयोध्या के प्रख्यात संत डॉ.मिथिलेशनंदनी शरण द्वारा दिल्ली में स्थित एक कान्क्लेव में अपने जो विचार अयोध्या के आम जनमानस के रूप में रखा गया था वह बहुत ही प्रासंगिक है। वर्दीधारियों का खौफ इतना है कि अयोध्या के आम निवासी भी इससे अछूते नहीं हैं। अयोध्या शहर के निवासी अश्वनी गुप्ता जो कि गोंडा जनपद में प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक पद पर तैनात हैं। वह प्रतिदिन अपने बाइक से गोंडा पढ़ाने के लिए जाते हैं। बाकौल अश्वनी गुप्ता उनको पुलिस वाले कहते हैं कि बाइक लेकर क्यों निकलते हो। उन्होंने जवाब दिया कि वह अयोध्या शहर के मूल निवासी हैं और गोंडा पढ़ाने जाते हैं। खाकीधारियों का कहना है कि वह अपनी कोई व्यवस्था कर लें, शहर में आना-जाना मना है। ऐसी दशा में वह क्या करें। स्थानीय कुछ लोगों को प्रशासन द्वारा पास जारी किया गया है, लेकिन उसकी भी प्रक्रिया काफी क्लिष्ट है।
इसी के साथ राजस्थान से अपने बेटे और परिवार के साथ चार पहिया वाहन से अयोध्या रामलला का दर्शन करने आई हुई एक बुजुर्ग महिला जो की चलने-फिरने में असमर्थ हैं और व्हीलचेयर पर उन्हें बैठाकर कहीं आना-जाना होता है। उनके वाहन को अयोध्या श्रीराम हास्पिटल से पहले राजनीति के तहत नवनिर्मित किए गए इकबाल अंसारी तिराहे पर पुलिस वालों द्वारा शहर में प्रवेश करने से रोक दिया गया। उनके बेटे यशवंत सिंह नें पुलिस वालों को बताया कि उनकी मां द्वारा पिछले 40 वर्षों से रामलला का मंदिर बनने के लिए व्रत रखा है कि वह है 24 घंटे में मात्र एक बार भोजन करेंगी। अब मंदिर बन चुका है और वह रामलला का दर्शन करने के पश्चात व्रत तोड़ेगी और दोनों समय भोजन करेंगी। चूंकि उनके वाहन में व्हीलचेयर लदा हुआ है और पुलिस वालों नें 80 वर्षीया बुजुर्ग महिला के वाहन को रामपथ पर जाने से रोक दिया। बुजुर्ग महिला के परिवार के लोगों द्वारा हजार मिन्नतें की गई, लेकिन पुलिस वाले टस से मस नहीं हुए। पुलिस वालों नें समझाया कि उनकी गाड़ी अंदर नहीं जा सकती है। वह किसी भी प्रकार से शहर में प्रवेश करें, इस मामले में पुलिस कुछ भी नहीं कर सकती है। उनके बेटे के अनुसार गोल्फ कोर्ट की चलने वाली गाड़ियों पर व्हीलचेयर कैसे लादें और परिवार के छोटे-छोटे बच्चों को लेकर रामलला का दर्शन कैसे करें?
पुलिस द्वारा लगाया गया उक्त नियम केवल आम जनता पर ही लागू होता है। इस दौरान बड़ी संख्या में वीआईपी लोग अपने साथ गाड़ियों का लंबा काफिला लेकर रामपथ पर धमाल मचाते हुए मिल जाएंगे। लेकिन आम जनता अपनी व्यथा को पुलिस को कितना भी बताए, पुलिस उसकी सुनने को तैयार नहीं है। वह उच्चाधिकारियों एवं ट्रैफिक व्यवस्था को बताकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। इस दौरान अगर कहीं बाहर से आया हुआ सैलानी अपना चार पहिया वाहन थोड़ी ही देर के लिए इधर-उधर खड़ी कर दिया तो रही- सही कसर अयोध्या नगर निगम के कर्मचारी 1000 रुपये का जुर्माना ठोंककर पूरी कर दे रहे हैं।
उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा अयोध्या में किए जा रहे उक्त रवैये का संदेश भारत के 25 राज्यों सहित केंद्र शासित प्रदेशों एवं पड़ोसी देश नेपाल में खूब अच्छी से जा रहा है।
अगर आपको अयोध्या के मुख्यमार्ग रामपथ पर जाना है तो आप अयोध्या के बड़े गद्दीनशींन महंत हों, पुलिस के आला अधिकारी हों,सांसद,विधायक अथवा मंत्री हों या वीवीआईपी हों, तब ही आप रामपथ पर अपने वाहन से जा सकते हैं। अन्यथा आपके लिए बहुत सारे नियम कानून हैं। अयोध्या में भीड़ की स्थिति को देखते हुए खाने-पीने एवं अन्य सामानों का दाम दोगुने मूल्य पर बिक रहा है। इसको संभालने के लिए कोई भी व्यवस्था नहीं है।
जून महीने में जब खूब गर्मी पड़ रही है, और बच्चों की छुट्टियां हैं। इस कारण अभिभावक अयोध्या घूमने की योजना बना रहे हैं। राम मंदिर की स्थिति यह है कि मंदिर परिसर में लगे हुए पत्थर जेठ महीने में खूब तप रहे हैं। नंगे पांव दर्शन के लिए जा रहे दर्शनार्थियों में छोटे-छोटे मासूम बच्चों सहित अन्य लोगों का रोना आप मंदिर परिसर में बखूबी देख और सुन सकते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक मंदिर में लगाए गए निम्न श्रेणी के पत्थर तेज सूर्य के प्रकाश में काफी ऊष्मित होकर खूब गर्म हो जा रहे हैं। जिससे मंदिर प्रांगण में दर्शनार्थियों को काफी संकट का सामना करना पड़ रहा है।
नेपथ्य में रहकर अयोध्या में निवास करने वाले कुछ रामनामी संतो नें बताया कि अयोध्या अब राम की न होकर वर्दीधारियों की हो गई है। इन लोगों नें करबद्ध रूप से बुजुर्ग महिलाओं से प्रार्थना किया है कि यह लोग इस घोर कलिकाल में रामलला का दर्शन करने न आएं। जैसे सब इंतजार किया वैसे आगामी सतयुग की प्रतीक्षा करें, भगवान के पार्षद उन्हें बालविग्रह का दर्शन स्वयं करा देंगे।
कुछ यही दशा अयोध्या श्मशान घाट का है,अपने परिजनों को मोक्ष प्रदान कराने हेतु पुण्य सलिला सरयू के घाट पर दाह संस्कार के लिए पहुंचे लोगों का है। व्यवस्था के अनुसार आप नवीन फोरलेन पुल के पास अंतिम संस्कार करिए और नहाने के लिए अपने साधन को छोड़कर करीब चार किलोमीटर की पदयात्रा कर स्नान करिए। इस दौरान अपने प्रियजनों को खोने के बाद गम में डूबे हुए लोग नंगे पांव स्नान करने जाते समय पीड़ित लोग अनेकानेक देशज भाषा में गालियों से अयोध्या विकास प्राधिकरण एवं नगर निगम को हृदय से नवाज रहे हैं।
विकास होना अच्छी बात है, लेकिन वह विकास किस काम का जिसमें आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़े। इसके लिए हुक्मरानों एवं सत्ता सिंहासन पर बैठे लोगों को आगे आना होगा। भले ही विकासवाद में अयोध्या को वर्ल्ड सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा हो, लेकिन भारत की जनता देशी ही है,जो अपने धार्मिक नियमों और रुढ़ियों को नहीं बदलती। राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े हुए लोगों पर भले ही लाख आरोप वर्तमान समय में लगाए जा रहे हों लेकिन भारत की धर्मभीरु जनता पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला है, वह नित्य-निरंतर तमाम कष्टों एवं पुलिसिया झिड़की सुनते हुए भगवान राम सहित संपूर्ण अयोध्या का दर्शन कर रही है।


