अजीत पार्थ न्यूज विशेष
नवसंवत्सर के चैत्र माह में लगने वाला बासंतिक नवरात्रि इस बार 19 मार्च 2026 दिन गुरुवार से प्रारंभ हो रहा है। गुरुवार के दिन मां दुर्गा का आगमन होने से माता का वाहन पालकी पर होगा। नवरात्रि का समापन 27 मार्च को होगा।
नवरात्रि के इन पावन दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरुपों का पूजन किया जाता है। नवरात्रि में मां दुर्गा का आगमन और प्रस्थान तय करता है कि आने वाले दिनों पर कैसा प्रभाव देखने को मिलेगा। मां दुर्गा के वाहन नवरात्रि किस दिन से प्रारंभ होगा और किस दिन समाप्त होगा इससे तय किया जाता है।
मां भगवती भाग्योदय केंद्रम् संकटमोचन वाराणसी के निदेशक प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित अविनाश चतुर्वेदी “चंदन” के अनुसार,चैत्र माह के बासंतिक नवरात्रि का आरंभ इस बार 19 मार्च गुरुवार से हो रहा है। ऐसे में मां दुर्गा का वाहन पालकी होगा।
शशिसूर्ये गजारूढ़ा , शनिभौमे तुरंगमे ।
गुरुशुक्रे च दोलायां बुधे नौका प्रकीर्तिता ।।
फलम् – गजे च जलदा देवी , छत्रभङ्ग तुरंगमे ।
नौकायां सर्व सिद्धिस्यात् दोलायां मरणं धुव्रम् ।।
श्रीमद् देवी भागवत महापुराण के अनुसार, जब भी नवरात्रि का आरंभ गुरुवार दिन से होता है तो तब-तब मां दुर्गा का आगमन पालकी पर होता है। मां का डोली पर आगमन होना शुभ संकेत नहीं माना जाता है। ऐसा होने पर युद्ध जैसा हालात बनते हैं और लोगों में रोग इत्यादि बढ़ता है। साथ ही आर्थिक उतार-चढ़ाव और सामाजिक अशांति फैलने की संभावना बनी रहती है।
मां दुर्गा के प्रस्थान का वाहन
शशिसूर्यदिने यदि सा विजया, महिषा गमनेरूज शोककरा ।
शनिभौमे यदि सा विजया चरणायुधयानकरी विकला ।।
बुधशुक्रे यदि सा विजया गजवाहनगा शुभवृष्टिकरा ।
सुरराजगुरौ यदि सा विजया नरवाहनगा शुभसौख्यकरा ।।
श्रीमददेवी भागवत महापुराण के अनुसार जब भी मातारानी शुक्रवार के दिन प्रस्थान करती हैं, तो उनका वाहन हाथी होता है। मां दुर्गा जब भी हाथी पर प्रस्थान करती हैं, तो तब-तब अच्छी वर्षा का योग होता है। साथ ही हिंदू नववर्ष के राजा गुरु रहेंगे। यह भी अच्छी वर्षा का संकेत दे रहे हैं। वहीं, हिंदू नव वर्ष में रोहिणी वास समुद्र में होने के कारण कुछ स्थानों पर अतिवृष्टि के कारण जन-धन हानि योग भी बन रहा है।
श्रीमद् देवी भागवत महापुराण के अनुसार अगर नवरात्रि का आरंभ रविवार या सोमवार के दिन होता है तब-तब माता का वाहन हाथी होता है। शनिवार और मंगलवार के दिन जब भी मां दुर्गा आगमन करती हैं तब माता का वाहन घोड़ा होता है। वहीं, गुरुवार और शुक्रवार से नवरात्र का आरंभ होने से मां दुर्गा का आगमन डोली अथवा पालकी से होता है। बुधवार के दिन नवरात्रि का आरंभ जब होता है तो मां दुर्गा का आगमन नाव पर होता है।
हाथी – जब भी मां दुर्गा का वाहन हाथी होता है तो वह शुभ माना जाता है। इससे अच्छी वर्षा, सुख समृद्धि बढ़ती है।
घोड़ा – माता का वाहन घोड़ा होने पर अशांति के संकेत, समय चुनौतीपूर्ण, सत्ता परिवर्तन और प्राकृतिक आपदा आदि के संकेत मिलते हैं।
डोली/पालकी – माता का वाहन पालकी होने से समय काफी संघर्षपूर्ण रहता है। आर्थिक उतार चढ़ाव, सामाजिक अस्थिरता, जन धन हानि के संकेत मिलते हैं।
नाव– मां दुर्गा का वाहन नाव से होने पर बहुत ही शुभ माना जाता है। नाव वाहन होने के कारण मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और लोगों में खुशहाली और समृद्धि बढ़ता है।
बासंतिक नवरात्रि का किन राशियों पर पड़ेगा क्या प्रभाव ?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस संयोग का शुभ प्रभाव मिथुन, तुला, धनु और कुंभ राशि के जातकों पर पड़ सकता है। इन राशियों के लोगों को मां भगवती की कृपा से पद, प्रतिष्ठा और सुख-समृद्धि मिलने की संभावना है।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
बासंतिक नवरात्रि के प्रथम दिन देवी की पूजा के साथ-साथ कलश स्थापित भी किया जाता है। यह बेहद शुभ और सुख-सौभाग्य लेकर आता है।
इस दिन पहला शुभ मुहूर्त प्रातः छः बजकर 52 मिनट से, प्रातः सात बजकर 43 मिनट तक रहेगा।
दूसरा मुहूर्त दोपहर 12 बजकर पांच मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।


