✍️ डा.अजीत मणि त्रिपाठी
🎇 नवरात्रि विशेष
सनातन धर्म में नवरात्रि का विशेष आध्यात्मिक एवं धार्मिक महत्त्व है। नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि के प्रारम्भ और समापन के समय माता के वाहन को लेकर भी भारतीय धार्मिक परम्परा एवं लोकज्योतिष में विशेष मान्यता मिलती है। मान्यता के अनुसार माता के आगमन और गमन के वाहन के आधार पर उस अवधि के सामाजिक,आर्थिक,कृषि एवं जनजीवन से जुड़े कुछ संकेतों की व्याख्या की जाती है।

जब माता दुर्गा का आगमन हाथी पर और गमन मुर्गे पर माना जाता है,तो लोकमान्यता में इसे विशेष संयोग माना जाता है। हाथी को ऐश्वर्य, स्थिरता, वर्षा, समृद्धि और राजकीय वैभव का प्रतीक माना गया है। दूसरी ओर मुर्गा जागरण, सक्रियता, संघर्ष,शीघ्रता तथा परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है।
इसलिए इस संयोग में एक ओर समृद्धि एवं विकास के संकेत माने जाते हैं,वहीं दूसरी ओर कुछ क्षेत्रों में तनाव,उतार-चढ़ाव और विवाद की संभावना की पारंपरिक व्याख्या की जाती है।
यह फलादेश लोकज्योतिषीय एवं धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है, इसे वैज्ञानिक भविष्यवाणी अथवा किसी व्यक्ति के निश्चित भविष्य का निर्धारण नहीं माना जाना चाहिए।
हाथी पर माता का आगमन
हाथी भारतीय परम्परा में शक्ति, ऐश्वर्य, स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक है। माता दुर्गा का हाथी पर आगमन होने पर लोकमान्यता में अच्छी वर्षा, कृषि में वृद्धि, अन्न-समृद्धि और आर्थिक गतिविधियों में विस्तार के संकेत माने जाते हैं।
कृषि प्रधान समाज में पर्याप्त वर्षा को समृद्धि का प्रमुख आधार माना गया है। इसलिए हाथी पर माता के आगमन को सामान्यतः शुभ संकेत के रूप में देखा जाता है।
मुर्गे पर माता का प्रस्थान
मुर्गा प्रातःकाल जागरण का प्रतीक है। वह सक्रियता, चेतना और परिवर्तन का संकेत देता है। दूसरी ओर लोकज्योतिष में मुर्गे को कभी-कभी संघर्ष, विवाद, शीघ्र निर्णय और अस्थिरता से भी जोड़ा जाता है। इसलिए माता का मुर्गे पर गमन होने पर पारंपरिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि के पश्चात सामाजिक एवं राजनीतिक गतिविधियों में तेजी, मतभेदों में वृद्धि तथा परिस्थितियों में उतार-चढ़ाव के संकेत माने जा सकते हैं। हालांकि इसका अर्थ किसी निश्चित अशुभ घटना से नहीं है।
बारह राशियों पर संभावित प्रभाव
1. मेष राशि
मेष राशि के जातकों के लिए यह नवरात्रि ऊर्जा, उत्साह और कार्यक्षेत्र में सक्रियता बढ़ाने वाली मानी जा सकती है। लंबे समय से रुके कार्यों को आगे बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं।
शुभ: नौकरी, व्यवसाय, नए कार्य और नेतृत्व क्षमता में वृद्धि।
सावधानी: क्रोध, जल्दबाजी और विवाद से बचना लाभकारी रहेगा।
2. वृषभ राशि
वृषभ राशि के लिए आर्थिक दृष्टि से समय उपयोगी रह सकता है। व्यापार एवं पारिवारिक मामलों में स्थिरता प्राप्त करने के प्रयास सफल हो सकते हैं।
शुभ: धन संबंधी योजनाओं, व्यापार और पारिवारिक सुख में वृद्धि के अवसर।
सावधानी: अनावश्यक खर्च तथा बिना विचार किए निवेश से बचें।
3. मिथुन राशि
मिथुन राशि के जातकों के लिए नए संपर्क एवं नई योजनाओं के बनने के संकेत माने जा सकते हैं। शिक्षा, लेखन, संचार तथा व्यवसाय से जुड़े लोगों को अवसर मिल सकते हैं।
शुभ: कार्यक्षेत्र में नए अवसर और संपर्कों का विस्तार।
सावधानी: किसी भी निर्णय में जल्दबाजी न करें और विवादित विषयों से दूर रहें।
4. कर्क राशि
कर्क राशि के लिए नवरात्रि पारिवारिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रह सकती है। परिवार में धार्मिक वातावरण बनने तथा पुराने मतभेद दूर होने के अवसर मिल सकते हैं।
शुभ: गृह-सुख, पारिवारिक सहयोग और धार्मिक कार्य।
सावधानी: भावनात्मक होकर कोई बड़ा निर्णय लेने से बचें।
5. सिंह राशि
सिंह राशि के जातकों में नेतृत्व क्षमता एवं आत्मविश्वास बढ़ सकता है। कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियां बढ़ने के साथ प्रतिष्ठा प्राप्त करने के अवसर भी बन सकते हैं।
शुभ: पद-प्रतिष्ठा, नेतृत्व एवं कार्यक्षेत्र में प्रगति।
सावधानी: अहंकार और अधिकारियों या सहकर्मियों से अनावश्यक विवाद से बचें।
6. कन्या राशि
कन्या राशि के लिए शिक्षा, प्रतियोगिता, व्यापार और योजनाओं के क्षेत्र में सकारात्मक अवसर बन सकते हैं। मेहनत का परिणाम प्राप्त होने की संभावना रहेगी।
शुभ: शिक्षा, व्यवसाय और योजनाओं में प्रगति।
सावधानी: स्वास्थ्य, तनाव और अनावश्यक खर्च पर ध्यान देना चाहिए।
7. तुला राशि
तुला राशि के जातकों के लिए संबंधों और साझेदारी के मामलों में यह अवधि महत्वपूर्ण रह सकती है। व्यापारिक सहयोग के नए अवसर मिल सकते हैं।
शुभ: व्यापार, साझेदारी और आर्थिक अवसर।
सावधानी: साझेदारी में किसी भी समझौते को ध्यानपूर्वक पढ़कर ही स्वीकार करें।
8. वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि के लिए यह समय साहस और परिश्रम से आगे बढ़ने का संकेत देता है। रुके हुए कार्यों को गति मिल सकती है।
शुभ: कार्यों में प्रगति और महत्वपूर्ण निर्णय लेने के अवसर।
सावधानी: क्रोध, विवाद और जोखिमपूर्ण निर्णयों से बचना चाहिए।
9. धनु राशि
धनु राशि के जातकों के लिए भाग्य एवं धार्मिक गतिविधियों से जुड़े अवसर बन सकते हैं। यात्रा, शिक्षा और ज्ञान-विस्तार के लिए समय उपयोगी हो सकता है।
शुभ: शिक्षा, धार्मिक कार्य, यात्रा और नए अवसर।
सावधानी: आय के साथ खर्च भी बढ़ सकता है, इसलिए आर्थिक अनुशासन आवश्यक है।
10. मकर राशि
मकर राशि के जातकों के लिए कर्मक्षेत्र में सक्रियता बढ़ सकती है। नई जिम्मेदारियां प्राप्त होने के साथ कार्यक्षेत्र में परिवर्तन के अवसर भी बन सकते हैं।
शुभ: नौकरी, व्यवसाय और कार्यक्षेत्र में प्रगति।
सावधानी: अत्यधिक कार्यभार तथा पारिवारिक तनाव को संतुलित रखें।
11. कुंभ राशि
कुंभ राशि के लिए नए लोगों से संपर्क तथा नई योजनाओं की शुरुआत के अवसर मिल सकते हैं। व्यापार और सामाजिक क्षेत्र में सक्रियता बढ़ सकती है।
शुभ: नए संपर्क, व्यापारिक अवसर और आय के नए साधन।
सावधानी: मित्रों या साझेदारों के साथ मतभेद होने पर धैर्य रखें।
12. मीन राशि
मीन राशि के लिए नवरात्रि आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष हो सकती है। धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ने तथा परिवार का सहयोग मिलने के संकेत माने जा सकते हैं।
शुभ: आध्यात्मिक उन्नति, धार्मिक कार्य और पारिवारिक सहयोग।
सावधानी: भावनाओं में बहकर आर्थिक या व्यक्तिगत निर्णय न लें।
कृषि और वर्षा के संबंध में पारंपरिक संकेत
हाथी को मेघ, वर्षा और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए माता के हाथी पर आगमन को लोकमान्यता में वर्षा एवं कृषि के लिए अनुकूल संकेत माना जाता है। किसानों के लिए अच्छी वर्षा, फसल की वृद्धि और अन्न-समृद्धि की कामना इस मान्यता से जुड़ी हुई है। हालांकि वास्तविक वर्षा और कृषि उत्पादन का निर्धारण मौसम, मानसून, मिट्टी, सिंचाई तथा अन्य वैज्ञानिक एवं आर्थिक परिस्थितियों से होता है।
नवरात्रि में क्या करें?
माता के हाथी पर आगमन और मुर्गे पर गमन की मान्यता के अवसर पर श्रद्धालु नवरात्रि में—
माँ दुर्गा की विधिवत पूजा करें। दुर्गा सप्तशती अथवा देवी स्तुति का पाठ करें। प्रतिदिन दीप प्रज्वलित करें।
कन्या पूजन एवं सामर्थ्य के अनुसार दान करें।
अन्न, वस्त्र अथवा आवश्यक सामग्री का दान करें।
क्रोध, अहंकार और विवाद से बचने का प्रयास करें।
नवरात्रि के दौरान सात्त्विक आहार एवं संयम का पालन करें।
मां भगवती भाग्योदय केंद्रम् काशी के निदेशक नव्यव्याकरणाचार्य एवं प्राख्यात ज्योतिषाचार्य अविनाश चतुर्वेदी “चंदन” के अनुसार सृष्टि की आधारभूता देवी मां भगवती के आराधना का महापर्व शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर रविवार से प्रारंभ होकर 20 अक्टूबर मंगलवार तक रहेगा। इस साल नवरात्र में तिथि की वृद्धि होने के कारण यह महापर्व 10 दिनों तक संचालित होगा। अष्टमी तिथि 2 दिन व्याप्त रहने से भक्तों को शक्ति की अधिष्ठात्री मां दुर्गा की भक्ति का विशेष अवसर प्राप्त होगा। कलश स्थापना के लिए अभिजित मुहूर्त प्रातः 11:20 से दोपहर 12:07 के मध्य है।
अविनाश चतुर्वेदी “चंदन” के अनुसार नवरात्र में महाष्टमी तिथि समाप्ति और महानवमी तिथि के आरंभ को संधिकाल कहा जाता है। अष्टमी तिथि का अंतिम 24 मिनट और नवमी तिथि के प्रारंभ के 24 मिनट में संधि पूजा होती है। संधि पूजा 19 अक्टूबर सोमवार को प्रातः 11:27 से 11:15 तक रहेगा।
पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी संधि काल में मां भगवती नें चामुंडा का रूप धारण कर चंड और मुंड नामक दो असुरों का वध किया था। शास्त्रों के अनुसार 20 अक्टूबर को विजयादशमी और 21 अक्टूबर को नवरात्र व्रत का पारण होगा।


