श्री परशुराम स्तोत्रम् : रचना- संस्कृति चतुर्वेदी 

रेणुकागर्भसंभूतं जमदग्निसुतं वरं धर्मसंरक्षणार्थायावतीर्णं तं नमाम्यहम्।१। शस्त्रशास्त्रप्रवीणं तं साधकं नीतिसर्जकम्। द्विजं परशुरामं तं विनिर्लिप्तं नमाम्यहम् ।२।…

चलो द्रष्टा बनें हम सब सुना है राम आये हैं

डॉ. उमाशंकर चतुर्वेदी “कंचन” वाराणसी सनातन धर्म के रक्षक दिये बलिदान तब जाकर है हर्षित आज…

error: Content is protected !!