हत्या के तीसरे दिन भी लक्ष्मण निषाद के शव का नहीं हो पाया अंतिम संस्कार, पुलिस कर रही है जद्दोजहद, दो आरोपियों नें किया आत्मसमर्पण, परिजन कर रहे हैं बुलडोजर कार्रवाई की मांग

अजीत पार्थ न्यूज बस्ती

जनपद के लालगंज थाना अंतर्गत मेहनौना ग्राम में विगत सोमवार की रात करीब साढे नौ बजे हुए लक्ष्मण निषाद हत्याकांड नें अब राजनैतिक रंग ले लिया है। हत्या के करीब 41 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन परिजन शव का अंतिम संस्कार करने से इंकार कर रहे हैं। जबकि घटना में नामजद दोनों मुख्य आरोपियों नें आत्मसमर्पण कर दिया है।

मंगलवार की शाम मृतक लक्ष्मण निषाद 50 का शव गांव में पहुंचने पर परिजनों नें अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। मामले की नजाकत को समझते हुए मौके पर मौजूद प्रशासन यह चाहता था कि पोस्टमार्टम के बाद मृतक का शव गांव में न जाकर सीधे नदी के घाट पर जाए। लेकिन परिजनों नें उनकी एक न सुनी और आरोपियों के घर पर बुलडोजर करवाई करने, मुआवजा सहित सरकारी नौकरी की मांग पर अड गए।

उक्त मामले में लगातार क्षेत्राधिकारी रुधौली कुलदीप यादव एवं उप जिलाधिकारी सदर हिमांशु कुमार सहित थानाध्यक्ष लालगंज विनय कुमार पाठक परिजनों से लगातार वार्ता कर रहे हैं। प्रशासन के अनुसार इस दौरान निषाद पार्टी के कई स्थानीय नेता मौके पर पहुंचकर मामले को तूल देने का प्रयास कर रहे हैं। उक्त मामले में बुधवार को घटना में मुख्य आरोपी सुधाकर पाल पुत्र निर्भय प्रकाश पाल व सौरभ पाल पुत्र स्व.संजय पाल निवासी ग्राम मेहनौना, थाना लालगंज, बस्ती ने पुलिस कार्यालय में आत्मसमर्पण कर दिया है।

इस दौरान पुलिस और मृतक के परिजनों से काफी देर तक बहस होने के साथ-साथ तूतू-मैंमैं का भी मामला प्रकाश में आया है। परिजनों नें आरोप लगाया है कि आरोपियों के निशाने पर लक्ष्मण निषाद थे। उनके अनुसार गाँव में कुछ दिन पूर्व अवैध खनन में लगी हुई कुछ गाड़ियों को सीज किया गया था, जिसमें लोगों का शक मृतक पर था कि उन्होंने मुखबिरी किया था। साथ ही लक्ष्मण निषाद के जमीन की कुछ लोगों द्वारा पैमाइश करने का भी प्रयास किया गया था। परिजन बार-बार यह कह रहे हैं कि घटना के दिन गांव के किस व्यक्ति ने मुखबिरी किया था कि लक्ष्मण निषाद बरगदहा पुल की तरफ गए हुए हैं।

फिलहाल गर्मी का तापमान अधिक होने की वजह से करीब 41 घंटे पुराने शव में रासायनिक अभिक्रिया होने के कारण शव खराब होने की स्थिति बन रही है। फिर भी परिजन पुलिस और प्रशासन को दरकिनार करते हुए अंतिम संस्कार से मना कर रहे हैं। गांव में अभी भी पीएसी की बटालियन गस्त कर रही है।

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