शासन स्तर पर लंबित मांगों पर ध्यान आकृष्ट करवाने के लिए न्यायालय कर्मचारियों नें निकाला तिरंगा यात्रा

🎇 न्यायालय कर्मचारियों की वर्षों से लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं हुआ तो 25 अक्टूबर को लखनऊ में होगा प्रदेशव्यापी सत्याग्रह

अजीत पार्थ न्यूज बस्ती

दीवानी न्यायालय कर्मचारी संघ उत्तर प्रदेश के आह्वान पर शासन स्तर पर वर्षों से लंबित न्यायालय कर्मचारियों के विभिन्न मांगों के निराकरण करवाने हेतु चलाए जा रहे सत्याग्रह आंदोलन के तृतीय चरण में शाखा जनपद न्यायालय बस्ती के कर्मचारियों ने राष्ट्रध्वज के साथ तिरंगा यात्रा निकालकर अपनी एकजुटता और संघर्ष का सशक्त संदेश दिया।

तिरंगा यात्रा में हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लिए सैकड़ों न्यायालय कर्मचारियों नें सहभागिता किया। तिरंगा यात्रा में संघ के मार्गदर्शक अवध बिहारी श्रीवास्तव नें कर्मचारी एकता जिंदाबाद, वंदेमातरम् के उद्घोष के साथ शुरुआत किया । यात्रा के माध्यम से कर्मचारियों ने शासन का ध्यान उन मांगों की तरफ आकृष्ट कराया, जो वर्षों से शासन के विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं और जिनका सीधा संबंध न्यायालय कर्मचारियों की सेवा-शर्तों, पदोन्नति और वेतनमान तथा कार्य-सुविधाओं से है।

उoप्रo दीवानी न्यायालय कर्मचारी संघ बस्ती के अध्यक्ष भागवत शुक्ल नें कहा कि न्यायालय कर्मचारी न्यायिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वह माननीय न्यायाधीशों, विद्वान अधिवक्ताओं और वादकारियों के मध्य समन्वय की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हुए न्यायिक प्रक्रिया को सुचारु एवं प्रभावी बनाने में निरंतर योगदान देते हैं। इसके बावजूद उनकी सेवा-संबंधी अनेक महत्वपूर्ण मांगें वर्षों से शासन स्तर पर लंबित होना दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि न्यायालय कर्मचारियों का कार्य महज सामान्य लिपिकीय दायित्वों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह न्यायिक कार्यप्रणाली से प्रत्यक्ष रूप से संबद्ध विशिष्ट एवं विधिक प्रकृति का दायित्व है। इसलिए कार्य की प्रकृति, उत्तरदायित्व और कार्यभार के अनुरूप उनकी सेवा-शर्तों एवं वेतनमान का निर्धारण किया जाना समय की आवश्यकता है।

संघ के अध्यक्ष भागवत शुक्ल नें स्पष्ट किया कि तिरंगा यात्रा आंदोलन का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि शासन का ध्यान आकृष्ट कराने के लिए संघर्ष के तृतीय चरण का महत्वपूर्ण पड़ाव है। यदि शासन द्वारा न्यायालय कर्मचारियों की मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं की जाती है, तो प्रदेश संघ के आह्वान पर 25 अक्टूबर को प्रदेशभर के न्यायालय कर्मचारी लखनऊ में एकत्र होकर सत्याग्रह करने के लिए बाध्य होंगे।

संघ के सचिव संतोष कुमार त्रिपाठी नें बताया कि न्यायालय कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में लिपिकीय संवर्ग का प्रारंभिक वेतनमान 2800 ग्रेड पे (लेवल-5) निर्धारित किए जाने तथा भर्ती की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता स्नातक किए जाने, 14वें वित्त आयोग के अंतर्गत एफटीसी में संविदा के आधार पर नियुक्त कर्मचारियों को तत्काल 10 प्रतिशत वार्षिक वेतनवृद्धि प्रदान किए जाने एवं उनके नियमितीकरण की प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग प्रमुख है।

इसके साथ ही कनिष्ठ सहायक से वरिष्ठ सहायक पद पर पदोन्नति के लिए अर्हकारी सेवा में 50 प्रतिशत शिथिलीकरण, 4600 ग्रेड पे वाले पदों को राजपत्रित दर्जा प्रदान किए जाने, न्यायालयों में बयान लेखक के पद सृजित किए जाने, मकान किराया भत्ते का पुनरीक्षण किए जाने तथा जनपद न्यायालयों में विलुप्त किए गए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के पद को पुनः सृजित किए जाने की मांग भी शामिल है।

वरिष्ठ उपाध्यक्ष वीरेंद्र चौधरी और संयुक्त सचिव रोहित कुमार जायसवाल नें कहा कि प्रदेश के जनपद न्यायालय लंबे समय से कर्मचारियों की कमी और बढ़ते कार्यभार का सामना कर रहे हैं। अतः कार्य की प्रकृति एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप नए पदों का सृजन किया जाना आवश्यक है। जब तक नए पदों का सृजन नहीं हो जाता, तब तक अतिरिक्त कार्य का निर्वहन करने वाले कर्मचारियों को उचित अतिरिक्त कार्य भत्ता प्रदान किया जाना चाहिए।

संघ के उपाध्यक्ष और मीडिया प्रभारी उमेश चंद्र जायसवाल एवं क्रीड़ा सचिव जैनेन्द्र कुमार यादव नें बताया कि न्यायालय कर्मचारियों का संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था को अधिक सक्षम, सुदृढ़ और कार्यकुशल बनाने के लिए उनकी जायज सेवा-संबंधी अपेक्षाओं के समाधान का प्रयास है।

तिरंगा यात्रा में अमित कुमार श्रीवास्तव, नियाज़ अहमद, अवध बिहारी श्रीवास्तव, आदर्श श्रीवास्तव, सुमित झा, जैनेन्द्र कुमार यादव, मनोज कुमार, राम चंद्र यादव, वैशाली गुप्ता, आराधना, प्रिन्सी, अंजू सागर, अजय प्रकाश श्रीवास्तव, शिवम तिवारी, संदीप शुक्ला, अश्वनी पाण्डेय, मनोज कुमार श्रीवास्तव, शत्रुघ्न पांडे, अंकित कुमार, धर्मेंद्र कुमार, सुनील कुमार, रामगोविंद, राधेश्याम सिंह, विनय प्रसाद तिवारी, मेराजुद्दीन, आशीष विश्वकर्मा, सतीश कुशवाहा, संजय सोनकर, प्रभाकर पाठक, विजय, बृजेश, निखिल, कुलदीप द्विवेदी, सालिक राम यादव, नीरज कुशवाहा, खुशबू गौतम, दीपक कुमार श्रीवास्तव सहित सैकड़ों न्यायालय कर्मचारी शामिल रहे।

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