एमएलसी चुनाव का मतपत्र लूटने के मामले में दो पूर्व विधायकों सहित आधा दर्जन को एमपी,एमएलए कोर्ट नें सुनाया 3 साल की सजा, सभी को भेजा जेल

अजीत पार्थ न्यूज बस्ती

जनपद में मंगलवार को एमपी एमएलए कोर्ट में हैरान करने वाले एक मामले में दो पूर्व विधायकों सहित कुल छः लोगों की सजा बरकरार रखी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार एमपी एमएलए न्यायालय के जज प्रमोद कुमार गिरी की पीठ नें भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक संजय प्रताप जायसवाल, पूर्व विधायक आदित्य विक्रम सिंह उर्फ बोकू पूर्व प्रमुखगण महेश सिंह एवं त्र्यंबकनाथ पाठक तथा अशोक कुमार सिंह एवं मोहम्मद इरफान को 3 वर्ष की सजा बरकरार रखा है। उक्त मामले में 20 मई 2023 को अवर न्यायालय नें सभी को दोषी मानते हुए 3 साल की सजा सुनाई थी। तब से सभी अभियुक्तगण जमानत पर थे, अभियुक्त गणों नें उक्त सजा के खिलाफ एमपी एमएलए न्यायालय में अपील किया था, जिसमें आदित्य विक्रम सिंह को छोड़कर अन्य सभी लोग मंगलवार को न्यायालय में हाजिर हुए थे।

न्यायालय नें निचली अदालत की सजा को बरकरार रखते हुए सबकी जमानत को निरस्त कर जेल भेज दिया तथा आदित्य विक्रम सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पुलिस को निर्देशित किया है।

उल्लेखनीय है कि साल 2003 में बस्ती-सिद्धार्थनगर स्थानीय प्राधिकारी विधान परिषद के चुनाव में मतदान के बाद 3 दिसंबर 2003 को तहसील बस्ती सदर परिसर में मतगणना हो रही थी। मतगणना अपने अंतिम चरण में थी कि उक्त मामले में आरोप लगा कि शाम को पौने चार बजे एमएलसी प्रत्याशी कंचना सिंह अपने पति आदित्य विक्रम सिंह निवासी अठदमा स्टेट,थाना रुधौली, बस्ती, संजय प्रताप जायसवाल पूर्व विधायक निवासी पांडेय बाजार, थाना पुरानी बस्ती, मोहम्मद इरफान पुत्र पूर्व विधायक कमाल युसूफ निवासी डुमरियागंज, जनपद सिद्धार्थ नगर पूर्व प्रमुख गौर महेश सिंह निवासी ग्राम डुहवा,थाना गौर,बस्ती, पूर्व प्रमुख परशुरामपुर त्र्यंबक पाठक निवासी ग्राम तक्कीपुर, थाना परशुरामपुर, पूर्व प्रमुख सल्टौवा बृजभूषण सिंह निवासी ग्राम पिपरा संसारपुर, थाना वाल्टरगंज और अशोक सिंह निवासी ग्राम पड़ी, थाना रुधौली के साथ 30-40 समर्थकों को लेकर मतगणना स्थल पर पहुंचे और सुरक्षा में लगे क्षेत्राधिकारी ओमप्रकाश सिंह से उक्त लोगों के बीच कहासुनी हुई। मुकदमे में आरोप लगा कि इन लोगों ने मतगणना कर रहे सहायक रिटर्निंग अधिकारी के साथ बदसलूकी किया गया और 50 की संख्या में मतपत्र उठा ले गए।

तत्कालीन जिलाधिकारी अनिल कुमार द्वितीय के निर्देश पर निर्वाचन अधिकारी राजीव शर्मा, जगन्नाथ प्रसाद और श्रीश दुबे की तरफ से शिकायती प्रार्थना पत्र कोतवाली थाने में मुकदमा पंजीकृत किया गया। विवेचना के बाद सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया था। सुनवाई के दौरान पूर्व प्रमुख बृजभूषण सिंह की मृत्यु हो गई थी तथा अन्य सभी आरोपियों के खिलाफ सुनवाई पूरी हुई। शासकीय अधिवक्ताओं ने उक्त मामले की सुनवाई के दौरान 10 गवाह प्रस्तुत किए थे।

दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद न्यायालय ने भद्दी-भद्दी गालियां देने और जान से मारने की धमकी की धारा 504, 506 भारतीय दंड संहिता में सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। किंतु धारा 147, 323, 353, 332 और 382 भारतीय दंड संहिता तथा सेवन क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट एवं 136 लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम में मुकदमे में आरोपित किए गए और सभी को दोषी ठहराया गया। उक्त सजा 3 साल से कम होने के कारण सभी को इसी अदालत से जमानत मिल गई थी।

गौरतलब है कि आरोपी कंचना सिंह और पूर्व प्रमुख बृजभूषण सिंह का निधन हो चुका है, साथ ही पूर्व विधायक आदित्य विक्रम सिंह उर्फ बोकू वर्तमान समय में अस्पताल में भर्ती है। एमएलसी चुनाव के दौरान मनीष जायसवाल विजयी हुए थे।

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